[Original] शनि चालीसा हिंदी में || Shani Chalisa Pdf Download || पूरी जानकारी एक साथ

यदि आप शनि चालीसा हिंदी में पीडीएफ (Shani Chalisa Pdf) डाउनलोड करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक से आप डाउनलोड करके फ्री में पढ़ सकते हैं. वैसे तो शनि महाराज की महिमा आपने सुनी होगी जिनके अनुसार इन्हें न्याय का देवता भी माना जाता है क्योंकि व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से उनको दंड देते हैं जिनकी तुलना शनि ग्रह के रूप में की गई है जिन को शांत करने हेतु धातु की बनी प्रतिमा पर तेल चढ़ाए जाते हैं यह कार्य मुख्य रूप से प्रत्येक सप्ताह के शनिवार को किया जाता है. शनि चालीसा का पीडीएफ (Shani Chalisa PDF) आप अपनी मोबाइल या लैपटॉप में आसानी से नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं.

शनि चालीसा हिंदी में Shani Chalisa Pdf Download

 शनि चालीसा पीडीएफ डाउनलोड लिंक के अलावे इस पोस्ट में  हमने शनि चालीसा के बारे में पूरे विस्तृत से  बताने वाले हैं इसलिए आप हमारे साथ अंत तक बने रहे. 

शनि चालीसा हिंदी में || Shani Chalisa Pdf Download

शनि देवता को न्याय का देवता माना जाता है जोकि अपने भक्तों के ऊपर हमेशा अपना ध्यान बनाए रखते हैं जिनको प्रसन्न करने हेतु शनि देवता को समर्पित शनि चालीसा को बनाया गया है जिसका उच्चारण करके कोई भी भक्त इनके बुरे प्रभावों से बच सकता है. शनि चालीसा पीडीएफ को डाउनलोड करके आप अपने मोबाइल या लैपटॉप में आसानी से पढ़ सकते हैं इसके अलावे हमने शनि चालीसा क्या है, शनि चालीसा आरती, शनि चालीसा की कथा और शनि मंत्र के साथ शनि चालीसा के फायदे विस्तार पूर्वक बताएं हैं जिसको आप पढ़ कर शनि भक्ति में विलीन हो सकते हैं जिससे आपके सारे कष्ट बहुत ही आसानी से दूर हो सकते हैं.

शनि चालीसा क्या है ( What is Shani Chalisa )

शनि चालीसा, भगवान शनि देव को प्रसन्न करने का एक श्रोत है जिसका नित्य दिन उच्चारण करने से शनि भक्तों के सारे कष्ट आसानी से दूर हो जाते हैं क्योंकि शनि देवता अपने भक्तों के ऊपर हमेशा अपनी कृपा बनाए रखते हैं जिसके लिए भक्त प्रत्येक शनिवार को पीपल के वृक्ष या इनके प्रतिमा के ऊपर तेल चढ़ाते हैं जिससे धर्म ग्रंथों के अनुसार शनिदेव खुश हो जाते हैं और अपने भक्तों के सारे कष्टों को दूर कर देते हैं. अतः यदि आप भी शनि चालीसा डाउनलोड करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं  आगे अब शनि चालीसा दिया गया है.

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शनि चालीसा चौपाई ( Shani Chalisa Chaupai )

हे शनि भक्तों, आपके लिए  शनि चालीसा चौपाई को दिया गया है  धर्म शास्त्रों के अनुसार इसके मदद से आप शनि देवता को प्रसन्न करके अपनी कष्टों को दूर कर सकते हैं.

|| शनि देव की चौपाई || 

जयति जयति शनिदेव दयाला ।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥1॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै ।
माथे रतन मुकुट छबि छाजै ॥2॥

परम विशाल मनोहर भाला ।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥3॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके ।
हिय माल मुक्तन मणि दमके ॥4॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा ।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥5॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन ।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन ॥6॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा ।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥7॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं ।
रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं ॥8॥

पर्वतहू तृण होई निहारत ।
तृणहू को पर्वत करि डारत ॥9॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो ।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥10॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई ।
मातु जानकी गई चुराई ॥11॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा ।
मचिगा दल में हाहाकारा ॥12॥

रावण की गति-मति बौराई ।
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥13॥

दियो कीट करि कंचन लंका ।
बजि बजरंग बीर की डंका ॥14॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा ।
चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥15॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी ।
हाथ पैर डरवायो तोरी ॥16॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो ।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥17॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों ।
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥18॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी ।
आपहुं भरे डोम घर पानी ॥19॥

तैसे नल पर दशा सिरानी ।
भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥20॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई ।
पारवती को सती कराई ॥21॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा ।
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥22॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी ।
बची द्रौपदी होति उघारी ॥23॥

कौरव के भी गति मति मारयो ।
युद्ध महाभारत करि डारयो ॥24॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला ।
लेकर कूदि परयो पाताला ॥25॥

शेष देव-लखि विनती लाई ।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥26॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना ।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥27॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी ।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥28॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं ।
हय ते सुख सम्पति उपजावैं ॥29॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा ।
सिंह सिद्धकर राज समाजा ॥30॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै ।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥31॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी ।
चोरी आदि होय डर भारी ॥32॥

तैसहि चारि चरण यह नामा ।
स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥33॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं ।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥34॥

समता ताम्र रजत शुभकारी ।
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी ॥35॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै ।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥36॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला ।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥37॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई ।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥38॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत ।
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥39॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा ।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥40॥

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|| शनि देवता को समर्पित दोहा ||

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार ।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

शनि चालीसा के महत्वपूर्ण पंक्तियाँ फोटो सहित

shani chalisa pdf photo
Shani Chalisa Pdf Photo

 

शनि चालीसा के महत्व और लाभ

शनि चालीसा पीडीएफ को डाउनलोड आपने अभी कर लिया है तो अब हम जानने वाले हैं किस शनि चालीसा (Shani Chalisa) को  क्यों जरूरी है और इससे क्या हमें लाभ मिलते हैं. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति शनि चालीसा का पाठ पड़ता है उसके ऊपर शनिदेव की कृपा बनी रहती है जिससे उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसके धन में बढ़ोतरी होता है इसके अलावे शनि देव की चालीसा को पढ़ने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं जिनमें से कुछ निम्न दिए गए हैं-

महत्व

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के ऊपर दुख, बाधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तो उसे इन सब कष्टों से मुक्ति पाने हेतु शनि देवता को प्रसन्न करना होता है जो कि न्याय के देवता भी कहे जाते हैं. प्रतीक शनिवार के दिन इनकी प्रतिमा पर सरसों के तेल चढ़ाए जाते हैं जिससे इनके भक्तों में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है और वह दुख और बाधा से मुक्त हो जाते हैं जो हमेशा सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए तत्पर रहते हैं. अतः यदि आप भी इन सब कष्टों से परेशान हैं तो हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार  शनि चालीसा  का पाठ काफी महत्वपूर्ण बताया गया है. 

शनि चालीसा के फायदे

शनि दोष को दूर करने हेतु –  जिस व्यक्ति के ऊपर शनि देव का प्रभाव पड़ जाता है उसके जीवन में कठिनाई और बधाई उत्पन्न होने लगती है. अतः जो व्यक्ति शनि चालीसा का पाठ नियमित रूप से भक्ति भाव से करता है उसके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति हो सकती है.

नकारात्मक प्रभाव को खत्म करने हेतु – हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार शनि देवता को नेगेटिविटी, परेशानी  और दुख का प्रतीक माना जाता है क्योंकि जब शनि देव हमसे नाराज होते हैं तो इतनी प्रभाव हमारे ऊपर दिखाई देते हैं जिन्हें दूर करने हेतु हमें भक्ति भाव के साथ शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए.

मन की शुद्धता हेतु – जो व्यक्ति शनि चालीसा का पाठ भक्ति भाव से करता है उसका मन शुद्ध हो जाता है जिससे उसके मन में शांति के साथ साथ अच्छे विचार भी उत्पन्न होने लगते हैं जिससे उसका नेगेटिविटी समाप्त हो जाता है.

संतान और परिवार की रक्षा – शनि चालीसा का पाठ करने से बच्चों की संतान की रक्षा होती है और परिवार में खुशहाली आती है। शनि देव की कृपा से परिवार की समृद्धि, सुख, और सुरक्षा प्राप्त हो सकती है।

परिवार और संतान की रक्षा हेतु – शनि चालीसा की कथा  सुनने  या शनि चालीसा पढ़ने से शनि देव आपके परिवार और संतान की रक्षा करते हैं जिससे आपके परिवार में सुख शांति के साथ खुशहाली आ सकती है अतः आप भी शनि चालीसा पीडीएफ (Shani Chalisa PDF) को अपने मोबाइल में डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं.

नैतिक शिक्षा और धर्म की रक्षा हेतु – शनि चालीसा के पाठ करने वाले व्यक्ति सत्य निष्ठा, ईमानदारी के भाव मजबूत हो जाते हैं और वह व्यक्ति सत्य और अहिंसा के मार्ग पर आसानी से चल सकता है. 

शनि चालीसा के पाठ का नियम || Shani Chalisa PDF

  • सबसे पहले आपको शनि चालीसा का पाठ करने हेतु शनिदेव के मंदिर या अपनी पूजा स्थल को चुनना होता है इसके अलावा आप शांत प्राकृतिक वातावरण में भी शनिदेव की पूजा कर सकते हैं.
  • इसके बाद आप स्नान करें और अपने मन को शुद्ध और शांत बनाएं
  • शनि चालीसा के पाठ हेतु पूजा की सामग्री तैयार करें जिसमें आप एक शनि चालीसा का पाठ  की पुस्तक ले, गंध, दीप, फूल, पुष्प की बनी एक माला, पानी और साथ में प्रसाद एकत्रित करें.
  •  शनिदेव की पूजा के शुरू में ही शनि देव के मंत्र का जाप करें जो “ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌॥” होता है.किस मंत्र का उच्चारण 108 बार करें.
  • अब शनि चालीसा के पाठ भक्ति भाव से करें.
  • पाठ खत्म होने के बाद शनि देव की आरती करें जिसके लिए शनि चालीसा आरती ऊपर पोस्ट में दिया गया है जहां से आप पढ़ सकते हैं.
  • शनि देव की आरती हो जाने के बाद जो भी प्रसाद आपने बनाए हैं  उस प्रसाद को आसपास के लोगों में  बांट दें.

अतः इस प्रकार आपकी शनिदेव की पूजा संपन्न हो जाती है और आपको हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार सुख समृद्धि के साथ धन (Money) का भी बढ़ोतरी होता है और आपके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं क्योंकि शनि देव आपके ऊपर हमेशा अपनी कृपा बनाए रखते हैं.

शनि चालीसा के मंत्र और अर्थ

शनि चालीसा की कथा सुनने वाले व्यक्ति किस सभी कष्ट शनिदेव दूर कर देते हैं परंतु जो व्यक्ति शनि भगवान की पूजा करना चाहता है उसके लिए शनि मंत्र और उसके अर्थ के कुछ उदाहरण हमने नीचे बताए हैं जिसकी मदद से शनिदेव की पूजा सत्य और निष्ठा भाव से कर सकता है और अपनी सभी कष्टों  से मुक्ति पा सकता है.

“जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय जय श्री शनिदेव दिन दयाल॥”

अर्थ –हे सदगुणों के धारक, हे कवियों के आदर्श ,अधिक दयालु और कृपालु गणपति भगवान, तुम्हारी जय हो। तुम विघ्नों को हरने वाले और मंगल करने वाले हो, हे श्री शनिदेव,तुम्हारी जय हो।

“नित नेम करौं भजन तेरा, प्रातः ही लगाउं विष्णु ध्यान।

तेल चढ़े शनि व्रत करौं, शमि संकट तुम्हारो निवारो॥”

अर्थ – रोज तेरे भजन करता हूँ और सुबह में विष्णु के ध्यान में लग जाता हूँ। मैं शनि व्रत के दौरान तेल चढ़ाता हूँ, जिससे मेरे संकट दूर हो जाते हैं, हे शनि देव, तुम मेरे संकटों को दूर करो॥

“नन्द तनय तुलसी माता, भ्राता नन्द जगदम्बा।

जाकी प्रतिमा घट महि, तिनके मन महिं वासा॥”

अर्थ-  हे तुलसी के पुत्र, जगदम्बा के भ्राता, जिनके मन में आप की प्रतिमा घट के समान हो, आप उन्हीं के मन में वास करते हैं.

अतः इन मंत्रों का उच्चारण चालीसा पाठ के दौरान की जाती है जिसके प्रभाव से शनिदेव प्रसन्न होकर आपके सभी कष्टों को दूर कर देते हैं.

शनि चालीसा (Shani Chalisa) के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • शनि चालीसा में कुल 40 श्लोक हैं.
  • शनि चालीसा के माध्यम से शनि देव को प्रसन्न किया जा सकता है.
  • ‘जय गणेश गिरिजा सुवन’ के उच्चारण से  शनि चालीसा की शुरुआत की जाती है.
  •  शनि चालीसा को गणेश चालीसा के नाम से भी जानते हैं.
  • शनि चालीसा को शुक्ल पक्ष के शनिवार को पढ़ने से ज्यादा लाभ मिलता है. 
  • शनि चालीसा के रोज पाठ करने से नाग दोष, नजर दोष और शनि दोष दूर हो जाते हैं.
  • शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाया जाता है.

शनि देव चालीसा डाउनलोड mp3

FAQs (Shani Chalisa/Shani Chalisa PDF)

Q.शनि चालीसा पढ़ने से क्या होता है?

Ans- शनि चालीसा (Shani Chalisa PDF) पढ़ने से आपके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं जिससे आपके शरीर में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है जिसके प्रभाव से आपके मन में उत्पन्न नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं जिसके कारण आपको सुख, समृद्धि के साथ धन की प्राप्ति भी होती है. (हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार)

Q.क्या हम घर पर शनि चालीसा पढ़ सकते हैं?

Ans –शनि चालीसा को आप अपने घर पर पढ़ सकते हैं जो आपके घर का पूजा स्थल सबसे उपयुक्त है जो शांत और शुद्ध होना चाहिए.

Q.शनि चालीसा कब करना चाहिए?

Ansशनि चालीसा को शुक्ल पक्ष के शनिवार को पढ़ने से ज्यादा लाभ मिलता है. इसके अलावा आप यदि सक्षम हो तो प्रतिदिन आप स्वस्थ एवं शुद्ध मन के साथ शनि चालीसा की कथा या शनि मंत्रों का उच्चारण कर सकते हैं.

Q.शनि चालीसा कितनी बार पढ़ना चाहिए?

Ans – शनि चालीसा आपको कम से कम 108 बार पढ़ना चाहिए

 

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